स्याम तन स्याम मन स्याम है हमारो धन,
आठों जाम ऊधौ हमें स्याम ही सों काम है । [1]
स्याम हिये स्याम जिये स्याम बिनु नाहिं तिये,
आँधेकी-सी लाकरी आधार स्याम नाम है ।। [2]
स्याम गति स्याम मति स्याम ही हैं प्रानपति,
स्याम सुखदाई सों भलाई सोभाधाम है । [3]
ऊधो तुम भए बौरे पाती लैके आए दौरे,
जोग कहाँ राखैं यहाँ रोम-रोम स्याम है ।। [4]
- श्री सूरदास, सूर सागर
गोपियाँ उद्धव से कहती हैं: श्याम ही हमारा तन है, श्याम ही हमारा मन है, श्याम ही हमारा धन है, आठों याम हमें श्याम से ही केवल काम है । [1]
श्याम ही हमारा हृदय है, श्याम ही हमारा जीवन है, श्याम बिन हमें एक पल को भी चैन नहीं । श्याम का नाम हमारे लिए अंधे की लकड़ी के समान है । [2]
श्याम ही हमारी गति एवं मति है, श्याम ही हमारे प्राणों के प्रतिपाल हैं । सुख के सिंधु श्यामसुंदर के सुख में ही हमारा सुख है । [3]
उद्धव तुम बौरा गए हो जो योग की शिक्षा हमको देने आए हो, तुम ही बताओ हम योग कहाँ रखें जब हमारा रोम रोम ही श्याम मय है । [4]
आठों जाम ऊधौ हमें स्याम ही सों काम है । [1]
स्याम हिये स्याम जिये स्याम बिनु नाहिं तिये,
आँधेकी-सी लाकरी आधार स्याम नाम है ।। [2]
स्याम गति स्याम मति स्याम ही हैं प्रानपति,
स्याम सुखदाई सों भलाई सोभाधाम है । [3]
ऊधो तुम भए बौरे पाती लैके आए दौरे,
जोग कहाँ राखैं यहाँ रोम-रोम स्याम है ।। [4]
- श्री सूरदास, सूर सागर
गोपियाँ उद्धव से कहती हैं: श्याम ही हमारा तन है, श्याम ही हमारा मन है, श्याम ही हमारा धन है, आठों याम हमें श्याम से ही केवल काम है । [1]
श्याम ही हमारा हृदय है, श्याम ही हमारा जीवन है, श्याम बिन हमें एक पल को भी चैन नहीं । श्याम का नाम हमारे लिए अंधे की लकड़ी के समान है । [2]
श्याम ही हमारी गति एवं मति है, श्याम ही हमारे प्राणों के प्रतिपाल हैं । सुख के सिंधु श्यामसुंदर के सुख में ही हमारा सुख है । [3]
उद्धव तुम बौरा गए हो जो योग की शिक्षा हमको देने आए हो, तुम ही बताओ हम योग कहाँ रखें जब हमारा रोम रोम ही श्याम मय है । [4]

