रट री मुरली मेरी राधे राधे - चाचा वृन्दावन दास जी

रट री मुरली मेरी राधे राधे - चाचा वृन्दावन दास जी

(राग भुपाली, तीन ताल)
रट री मुरली मेरी राधे राधे ।
येई मेरे साधन आराधन रस सींवा गुण रूप अगाधे ॥ [1]
जा कारन मैं मृदु मुख धारी सो बिसरै जिन तू पल आधे ।
वृन्दावन हित मंत्र मोहनी जपौ निरन्तर पूजै साधे ॥ [2]

- चाचा वृन्दावन दास जी

श्री कृष्ण कहते हैं कि "हे मेरी मुरली, तू "राधे राधे" का जाप कर । यह दिव्य नाम ही मेरी साधना है, इसीकी मैं आराधना करता हूँ । यह राधा नाम रस की सींवा है, जिसके गुण एवं रूप का सौंदर्य अगाध है ।" [1]

श्री राधा नाम के उच्चारण एवं श्रवण के लिए ही मैंने तुम्हें अपने अधरों पर धारण किया है, तुम इस मधुर राधा नाम को आधे क्षण के लिए भी नहीं भूलना । चाचा वृन्दावन दास जी कहते हैं "श्री राधा नाम मोहनी मंत्र है जिसको निरंतर जपने से ह्रदय की समस्त कामना की पूर्ति हो जाती है ।" [2]