एक राधा ब्रज में बसै, एक राधा रास विलास।
तीजी राधा कुंज में, दुलरावे हरिदास॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (714)
एक राधा ब्रज में ब्रजेश्वरी स्वरूप से निवास करती हैं, एक राधा रास-लीला में रासेश्वरी स्वरूप से विलास करती हैं, और तीसरी राधा नित्य निकुंज-विहारिणी स्वरूप से निकुंजों में नित्य विहार करती हैं, जिन्हें रसिक-शिरोमणि स्वामी हरिदास जी लाड़ लड़ाते हैं।
तीजी राधा कुंज में, दुलरावे हरिदास॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, विशिष्ट पद एवं साखी (714)
एक राधा ब्रज में ब्रजेश्वरी स्वरूप से निवास करती हैं, एक राधा रास-लीला में रासेश्वरी स्वरूप से विलास करती हैं, और तीसरी राधा नित्य निकुंज-विहारिणी स्वरूप से निकुंजों में नित्य विहार करती हैं, जिन्हें रसिक-शिरोमणि स्वामी हरिदास जी लाड़ लड़ाते हैं।

