(राग मल्हार)
झूलत नवल बिहारी हिंडोरे ।
संग झूलत वृषभानुनंदिनी प्रानहुं ते प्यारी ॥ [1]
नीलांबर पीतांबर की छबि घनदामिनी अनुहारी।
पुलकि पुलकि प्रीतम उर लागत गोविंद जन बलिहारी ॥ [2]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी
नवल बिहारी श्री कृष्ण आज अपनी प्राण-प्यारी वृषभानुनंदिनी श्री राधा के संग झूला झूल रहे हैं । [1]
श्री राधा का नीलाम्बर (नीला वस्त्र) और श्री कृष्ण का पीतांबर (पीला वस्त्र) की छबि श्याम वर्ण के मेघ एवं बिजली के सामान प्रतीत हो रही है । श्री गोविन्द दास कहते हैं कि "दोनों प्रिया-प्रियतम पुलक-पुलक कर एक दूसरे को ह्रदय से लगाते हैं और सखियाँ इस दृश्य को देखकर अपने प्राणों को युगल किशोर पर बलिहार करती हैं ।" [2]
झूलत नवल बिहारी हिंडोरे ।
संग झूलत वृषभानुनंदिनी प्रानहुं ते प्यारी ॥ [1]
नीलांबर पीतांबर की छबि घनदामिनी अनुहारी।
पुलकि पुलकि प्रीतम उर लागत गोविंद जन बलिहारी ॥ [2]
- श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी
नवल बिहारी श्री कृष्ण आज अपनी प्राण-प्यारी वृषभानुनंदिनी श्री राधा के संग झूला झूल रहे हैं । [1]
श्री राधा का नीलाम्बर (नीला वस्त्र) और श्री कृष्ण का पीतांबर (पीला वस्त्र) की छबि श्याम वर्ण के मेघ एवं बिजली के सामान प्रतीत हो रही है । श्री गोविन्द दास कहते हैं कि "दोनों प्रिया-प्रियतम पुलक-पुलक कर एक दूसरे को ह्रदय से लगाते हैं और सखियाँ इस दृश्य को देखकर अपने प्राणों को युगल किशोर पर बलिहार करती हैं ।" [2]

