किशोरी जू तुम चरणन बलिहारी।
उनइस चिह्न बिराजत जिन्ह मध, रसकन की रखवारी॥ [1]
पौढ़त सेज तबहिं जिन्ह चरणन, चांपत लाल बिहारी।
हिय दृग लाय चूम सचु पावत, निरख रहत शोभारी॥ [2]
जिन चरणन तर मुकुट परै पिय, मान मनावत प्यारी।
हिय हित उमँग मिलत ताही छिन, जिन चरणन महिमारी॥ [3]
शक्ति अनन्त रही जिन चरणन, बसीकरण पिय को जो सदारी।
जै श्री मोहन लाल आस तिन, चरणन बनत न कह उपमारी॥ [4]
- श्री मोहनलाल जी
हे किशोरी जू, आपके चरणों के मध्य 19 चिन्ह विराजमान हैं, जो रसिकों के प्राण हैं, उन चरणों की बलिहारी है। [1]
जब आप सेज पर विश्राम करती हैं, तो श्री कृष्ण आपके चरणों का संवाहन करते हैं, उन्हें अपने नेत्रों से एवं ह्रदय से लगाते हैं, उन्हें चुम कर आनंदित होते हैं एवं उनकी शोभा को निहारते रहते हैं। [2]
जब श्री राधा मान करती हैं तब श्री कृष्ण उनके चरणों में अपना मोर-मुकुट रखकर उन्हें मनाते हैं, तब श्री राधा हर्षित ह्रदय से श्री कृष्ण से मिलतीं हैं, ऐसी महिमा है प्यारी जू के चरणों की। [3]
श्री श्यामा जू के चरणों की शक्ति अनन्त है, यह श्री कृष्ण को भी अपने वश में कर लेते हैं। श्री मोहनलाल जी कहते हैं "मुझे उन्हीं चरणों की आशा है, जिसके लिए कोई उपमा नहीं है।" [4]
उनइस चिह्न बिराजत जिन्ह मध, रसकन की रखवारी॥ [1]
पौढ़त सेज तबहिं जिन्ह चरणन, चांपत लाल बिहारी।
हिय दृग लाय चूम सचु पावत, निरख रहत शोभारी॥ [2]
जिन चरणन तर मुकुट परै पिय, मान मनावत प्यारी।
हिय हित उमँग मिलत ताही छिन, जिन चरणन महिमारी॥ [3]
शक्ति अनन्त रही जिन चरणन, बसीकरण पिय को जो सदारी।
जै श्री मोहन लाल आस तिन, चरणन बनत न कह उपमारी॥ [4]
- श्री मोहनलाल जी
हे किशोरी जू, आपके चरणों के मध्य 19 चिन्ह विराजमान हैं, जो रसिकों के प्राण हैं, उन चरणों की बलिहारी है। [1]
जब आप सेज पर विश्राम करती हैं, तो श्री कृष्ण आपके चरणों का संवाहन करते हैं, उन्हें अपने नेत्रों से एवं ह्रदय से लगाते हैं, उन्हें चुम कर आनंदित होते हैं एवं उनकी शोभा को निहारते रहते हैं। [2]
जब श्री राधा मान करती हैं तब श्री कृष्ण उनके चरणों में अपना मोर-मुकुट रखकर उन्हें मनाते हैं, तब श्री राधा हर्षित ह्रदय से श्री कृष्ण से मिलतीं हैं, ऐसी महिमा है प्यारी जू के चरणों की। [3]
श्री श्यामा जू के चरणों की शक्ति अनन्त है, यह श्री कृष्ण को भी अपने वश में कर लेते हैं। श्री मोहनलाल जी कहते हैं "मुझे उन्हीं चरणों की आशा है, जिसके लिए कोई उपमा नहीं है।" [4]

