मथुरामण्डले रम्ये यमुनातीरनिर्मले । तत्र भव्यतमं धाम द्रुमपल्लवसंकुलम् ॥
फलिनः शाखिनो यत्र ऋृतवश्च सदा स्थिराः । शान्ताश्च जन्तवो यत्र, युग्मध्यानाय तत्पराः ॥
- सनत्कुमार संहिता (31.9)
मथुरा मण्डल में यमुना तट पर स्थित यह भव्यधाम वृन्दावन लता पता, द्रुम-पल्लवों से अत्यन्त सुशोभित है । वहाँ के वृक्ष सदा फूले-फले हुए रहते हैं । सभी ऋतुयें समान रहती हैं । वहाँ का प्रत्येक जीव-जन्तु सहज ही युगलकिशोर के ध्यान में तत्पर रहता है ।
फलिनः शाखिनो यत्र ऋृतवश्च सदा स्थिराः । शान्ताश्च जन्तवो यत्र, युग्मध्यानाय तत्पराः ॥
- सनत्कुमार संहिता (31.9)
मथुरा मण्डल में यमुना तट पर स्थित यह भव्यधाम वृन्दावन लता पता, द्रुम-पल्लवों से अत्यन्त सुशोभित है । वहाँ के वृक्ष सदा फूले-फले हुए रहते हैं । सभी ऋतुयें समान रहती हैं । वहाँ का प्रत्येक जीव-जन्तु सहज ही युगलकिशोर के ध्यान में तत्पर रहता है ।

