यह तनु नय्या झांझरी, मन मलीन मल्लाह।
वल्ली राधा नाम ले, जो तू चाहै थाह॥
- ब्रज के दोहे
जीवात्मा यात्री के लिए यह शरीर मानो एक नय्या है, जो संसार-समुद्र के तेज झंझावातों में डगमगाती रहती है; और उसका मल्लाह यह मलिन मन है, जो बार-बार उसी भव-सागर में फँसाए रखता है। यदि तुम इस नय्या को स्थिर कर सदा-सदा के लिए पार उतरना चाहते हो, तो श्री राधा-नाम रूपी बल्ली को अपने मन को पकड़ा दो—उसी का सहारा तुम्हें थाह तक पहुँचा देगा।
वल्ली राधा नाम ले, जो तू चाहै थाह॥
- ब्रज के दोहे
जीवात्मा यात्री के लिए यह शरीर मानो एक नय्या है, जो संसार-समुद्र के तेज झंझावातों में डगमगाती रहती है; और उसका मल्लाह यह मलिन मन है, जो बार-बार उसी भव-सागर में फँसाए रखता है। यदि तुम इस नय्या को स्थिर कर सदा-सदा के लिए पार उतरना चाहते हो, तो श्री राधा-नाम रूपी बल्ली को अपने मन को पकड़ा दो—उसी का सहारा तुम्हें थाह तक पहुँचा देगा।

