राधा नाम मुकट मनि मंत्र -  श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (46)

राधा नाम मुकट मनि मंत्र - श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (46)

(राग भैरौं)
राधा नाम मुकट मनि मंत्र ।
आगम वेद पुरान अगोचर
ढूढे त्रिभवन तंत्र ।। [1]
मोहन मन कों वसीकरन है
भूलें हूँ नहीं अंत्र ।
रसिक रूप गावति निसिवासर
हरषि बजावति जंत्र ।। [2]

- श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (46)

समस्त मंत्रों का मुकुट मणि एवं शिरोमणि मंत्र श्री “राधा” नाम है जो आगम, वेद, पुराण आदि से भी परे है एवं तंत्र भी जिसे त्रिलोक में खोजने का प्रयास कर रहे हैं । [1]

यह राधा नाम ही वह मंत्र है जो साक्षात श्री कृष्ण चंद्र के मन को भी मोह लेता है एवं जिसे वह एक क्षण के लिए भी विस्मृत नहीं करते । श्री रूप सखी जी कहते हैं कि रसिक शिरोमणि श्री श्याम सुंदर तो निशि दिन इस अद्बुत राधा नाम को ही हर्षपूर्वक [प्रेम में विभोर होकर] मुरली में गाते हैं । [2]