श्रीवृन्दावन अति सुखदाई ।
श्रीयमुनाजी चहुँदिशि सोहैं, ललित लहरि लहराई ॥ [1]
दरसन सों अघ जात जनन के, न्हावत जम डर जाई ।
शीतल नीर प्रेम भक्ती प्रद, माया मोह नसाई ॥ [2]
दर्शन करत विहारी जी को, मन नित नित ललचाई ।
देश देश के भक्त रसिक जन, तन मन रहे लुटाई ॥ [3]
श्री वृन्दावन नाम उचारत, रोम रोम हरषाई ।
कोटि जनम की कटै आपदा, राधा नाम जो गाई ॥ [4]
वृन्दावन रज की महिमा अति, ब्रह्मा वरनि सुनाई।
'भक्तमालि' श्रीगुरु करुणा सों, कछु महिमा उर आई ॥ [5]
- श्री भक्तमाली जी
श्री वृन्दावन धाम अत्यंत सुखदाई है जिसके चारों ओर श्री यमुना जी शोभायमान हैं जिसमें सुन्दर रस की लहरें हिलोरे ले रही हैं । [1]
श्री यमुना जी के दर्शन मात्र से ही जीवों के पाप नष्ट होते हैं एवं जल में स्नान करने से यमराज का भय समाप्त हो जाता है । जिसका शीतल जल भक्ति प्रदान करता है एवं माया मोह का नाश करता है । [2]
श्री वृन्दावन में जिनके दर्शन के लिए देश-विदेश से भक्तगण आते हैं एवं अपने तन-मन को नयौछावर करते हैं, उन श्री बांके बिहारी जी का दर्शन करने पर ह्रदय में बार-बार उनके दर्शन का लोभ बढ़ने लगता है । [3]
श्री वृन्दावन का नाम उच्चारण करते ही रोम-रोम हर्षित हो जाता है । कोटि-कोटि जन्मों की आपदा श्री “राधा” नाम के गान से मिट जाती है । [4]
श्री वृन्दावन की दिव्य रज की महिमा स्वयं श्री ब्रह्मा जी ने गायी है । श्री भक्तमाली जी कहते हैं कि यह गुरु की कृपा का ही फल है कि श्री वृन्दावन की रज की कुछ महिमा मेरे ह्रदय में भी प्रकाशित हुई है । [5]
श्रीयमुनाजी चहुँदिशि सोहैं, ललित लहरि लहराई ॥ [1]
दरसन सों अघ जात जनन के, न्हावत जम डर जाई ।
शीतल नीर प्रेम भक्ती प्रद, माया मोह नसाई ॥ [2]
दर्शन करत विहारी जी को, मन नित नित ललचाई ।
देश देश के भक्त रसिक जन, तन मन रहे लुटाई ॥ [3]
श्री वृन्दावन नाम उचारत, रोम रोम हरषाई ।
कोटि जनम की कटै आपदा, राधा नाम जो गाई ॥ [4]
वृन्दावन रज की महिमा अति, ब्रह्मा वरनि सुनाई।
'भक्तमालि' श्रीगुरु करुणा सों, कछु महिमा उर आई ॥ [5]
- श्री भक्तमाली जी
श्री वृन्दावन धाम अत्यंत सुखदाई है जिसके चारों ओर श्री यमुना जी शोभायमान हैं जिसमें सुन्दर रस की लहरें हिलोरे ले रही हैं । [1]
श्री यमुना जी के दर्शन मात्र से ही जीवों के पाप नष्ट होते हैं एवं जल में स्नान करने से यमराज का भय समाप्त हो जाता है । जिसका शीतल जल भक्ति प्रदान करता है एवं माया मोह का नाश करता है । [2]
श्री वृन्दावन में जिनके दर्शन के लिए देश-विदेश से भक्तगण आते हैं एवं अपने तन-मन को नयौछावर करते हैं, उन श्री बांके बिहारी जी का दर्शन करने पर ह्रदय में बार-बार उनके दर्शन का लोभ बढ़ने लगता है । [3]
श्री वृन्दावन का नाम उच्चारण करते ही रोम-रोम हर्षित हो जाता है । कोटि-कोटि जन्मों की आपदा श्री “राधा” नाम के गान से मिट जाती है । [4]
श्री वृन्दावन की दिव्य रज की महिमा स्वयं श्री ब्रह्मा जी ने गायी है । श्री भक्तमाली जी कहते हैं कि यह गुरु की कृपा का ही फल है कि श्री वृन्दावन की रज की कुछ महिमा मेरे ह्रदय में भी प्रकाशित हुई है । [5]

