निंदा करै सो धोबी कहिए, अस्तुति करै सो भाट ।
अस्तुति निंदा दोउन ते न्यारौ, सोई साधु निराट॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (28)
जो निंदा करता है, उसे सांसारिक भाषा में धोबी कहते हैं; और जो किसी की स्तुति करता है, उसे भाट कहते हैं। परंतु जो स्तुति और निंदा—दोनों से परे होकर समभाव में स्थित रहता है, वही एकांतिक साधु कहलाता है।
अस्तुति निंदा दोउन ते न्यारौ, सोई साधु निराट॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (28)
जो निंदा करता है, उसे सांसारिक भाषा में धोबी कहते हैं; और जो किसी की स्तुति करता है, उसे भाट कहते हैं। परंतु जो स्तुति और निंदा—दोनों से परे होकर समभाव में स्थित रहता है, वही एकांतिक साधु कहलाता है।

