जमुना कूल सुहावनो, ललित बलित तरु-बेलि ।
सूचत राधारमन की, महा मधुर रसकेलि ॥
- श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (8)
श्री यमुना जी का वह सुंदर किनारा, जहाँ अत्यंत मनोहर वृक्ष और लताएँ एक-दूसरे से लिपटी हुई हैं, वह स्थान साक्षात् श्री राधा-रमण की परम मधुर और रसमय क्रीड़ाओं का संकेत दे रहा है।
सूचत राधारमन की, महा मधुर रसकेलि ॥
- श्री आनंदघन, घनानंद ग्रंथावली, ब्रजविलास (8)
श्री यमुना जी का वह सुंदर किनारा, जहाँ अत्यंत मनोहर वृक्ष और लताएँ एक-दूसरे से लिपटी हुई हैं, वह स्थान साक्षात् श्री राधा-रमण की परम मधुर और रसमय क्रीड़ाओं का संकेत दे रहा है।

