रति रण जीति पौढ़ी बाल - श्री हित विनोद अलि जी

रति रण जीति पौढ़ी बाल - श्री हित विनोद अलि जी

(राग देश)
रति रण जीति पौढ़ी बाल ।
कोक दावन हाव भावन विवस कीने लाल ॥
शिथिल भूषण वसन अँग-अँग मरगजी उर माल ।
(जै श्री) हित विनोद अलि चरण सेवत कृष्ण दस तिहिकाल ॥

- श्री हित विनोद अलि जी

सुख से शैय्या पर पौढ़ी श्री राधा ने सूरत-युद्ध को जीत लिया है एवं दिव्य प्रेम के दांव और अपने हाव-भावों से श्री कृष्ण को विवश कर दिया है । [1]

सूरत-युद्ध में श्री कृष्ण के आभूषण, गलमाल, वस्त्र एवं उनके अंग-अंग शिथिल हो गए हैं । श्री हित विनोद अलि जी कहते हैं "ऐसे अवसर पर श्री कृष्ण दास बनकर श्री राधा के चरण कमलों का संवाहन कर रहे हैं ।" [2]