श्री राधिका श्याम की प्यारी, कृपा बास ब्रज पाऊँ ।
नव निकुंज बन धाम निकट इक, आनंदकुटी रचाऊँ ॥
- श्री सूरदास जी
हे श्री श्यामसुंदर की प्राणप्रिय श्री राधिका! आपकी अहैतुकी कृपा से मुझे पावन ब्रज मण्डल में वास प्राप्त हो। मेरी यही अभिलाषा है कि आपके नित्य-नवीन निकुञ्ज धाम के समीप ही मैं अपनी एक छोटी सी 'आनंदकुटी' (आनंद की कुटिया) बनाऊँ, जहाँ बैठकर निरंतर भक्ति करूँ।
नव निकुंज बन धाम निकट इक, आनंदकुटी रचाऊँ ॥
- श्री सूरदास जी
हे श्री श्यामसुंदर की प्राणप्रिय श्री राधिका! आपकी अहैतुकी कृपा से मुझे पावन ब्रज मण्डल में वास प्राप्त हो। मेरी यही अभिलाषा है कि आपके नित्य-नवीन निकुञ्ज धाम के समीप ही मैं अपनी एक छोटी सी 'आनंदकुटी' (आनंद की कुटिया) बनाऊँ, जहाँ बैठकर निरंतर भक्ति करूँ।

