संत जगत में सो सुखी, मैं मेरी को त्याग ।
नारायण गोविंद पद, दृढ़ राखत अनुराग॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (93)
संत जगत में वही सुखी है जो “मैं” और “मेरी” का त्याग कर दृढ़तापूर्वक श्री गोविंद के चरणों में अनुराग रखता है।
नारायण गोविंद पद, दृढ़ राखत अनुराग॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (93)
संत जगत में वही सुखी है जो “मैं” और “मेरी” का त्याग कर दृढ़तापूर्वक श्री गोविंद के चरणों में अनुराग रखता है।

