(राग मधुमाध सारंग)
या ब्रज में कछु देख्यौ री टोना ।।
लै मटकी सिर चली गुजरिया
आगे मिले बाबा नंदजी के छोना । [1]
दधिको नाम बिसरि गयो प्यारी
लेलेहु री कोउ स्याम सलोना ।। [2]
बिंद्राबन की कुंज गलिन में
आँख लगाय गयो मनमोहना । [3]
मीरा के प्रभु गिरधर नागर
सुंदर स्याम सुघर रसलौना ।। [4]
- श्री मीराबाई
मैंने ब्रज में एक टोना होते हुए देखा । एक ब्रज की युवती अपने सिर पर दही बेच रही है। रास्ते में उसे नंदलाल श्री कृष्ण मिले । [1]
वह दही का नाम भूल गई और दही के स्थान पर वह पूछती है "कोई श्याम सुंदर को कौन ले लो" । [2]
वृंदावन की कुंज गलि में उसकी आँखें श्री श्यामसुंदर की आँखों से मिल चुकी हैं। [3]
श्री मीरा जी कहती हैं कि उनके प्रभु श्री गिरिधर लाल श्याम सुंदर हैं जो सुंदर रस की वर्षा करने वाले हैं । [4]
या ब्रज में कछु देख्यौ री टोना ।।
लै मटकी सिर चली गुजरिया
आगे मिले बाबा नंदजी के छोना । [1]
दधिको नाम बिसरि गयो प्यारी
लेलेहु री कोउ स्याम सलोना ।। [2]
बिंद्राबन की कुंज गलिन में
आँख लगाय गयो मनमोहना । [3]
मीरा के प्रभु गिरधर नागर
सुंदर स्याम सुघर रसलौना ।। [4]
- श्री मीराबाई
मैंने ब्रज में एक टोना होते हुए देखा । एक ब्रज की युवती अपने सिर पर दही बेच रही है। रास्ते में उसे नंदलाल श्री कृष्ण मिले । [1]
वह दही का नाम भूल गई और दही के स्थान पर वह पूछती है "कोई श्याम सुंदर को कौन ले लो" । [2]
वृंदावन की कुंज गलि में उसकी आँखें श्री श्यामसुंदर की आँखों से मिल चुकी हैं। [3]
श्री मीरा जी कहती हैं कि उनके प्रभु श्री गिरिधर लाल श्याम सुंदर हैं जो सुंदर रस की वर्षा करने वाले हैं । [4]

