ललिता चरण चापैं पौढ़ीं कुंज श्यामा।
लाल ललचावें कहें धन्य धन्य बामा॥
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (430)
श्री श्यामा जू एक सुंदर कुंज में लेटी हुई हैं और श्री ललिता जी उनके चरण चाप रही हैं। श्री श्यामसुंदर ललचाते हुए कहते हैं "धन्य धन्य हैं श्री ललिता जी"।
लाल ललचावें कहें धन्य धन्य बामा॥
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (430)
श्री श्यामा जू एक सुंदर कुंज में लेटी हुई हैं और श्री ललिता जी उनके चरण चाप रही हैं। श्री श्यामसुंदर ललचाते हुए कहते हैं "धन्य धन्य हैं श्री ललिता जी"।

