(सवैया)
आग लगे उन पैरन में जो, श्रीवृन्दावन धाम न जावें। [1]
आग लगे उन अँखियन में जो, दिन दर्शन राधे श्याम न पावें॥ [2]
आग लगे ऐसे धन में जो, हरि सेवा के काम न आवें। [3]
आग लगे वा जिह्वा में जो, दिन गुणगान राधेश्याम न गावें॥ [4]
- ब्रज के सेवैया
यदि मेरे चरण श्री वृन्दावन धाम में नहीं जाते, ऐसे चरणों में आग लग जाए। [1]
आग लगे उन पैरन में जो, श्रीवृन्दावन धाम न जावें। [1]
आग लगे उन अँखियन में जो, दिन दर्शन राधे श्याम न पावें॥ [2]
आग लगे ऐसे धन में जो, हरि सेवा के काम न आवें। [3]
आग लगे वा जिह्वा में जो, दिन गुणगान राधेश्याम न गावें॥ [4]
- ब्रज के सेवैया
यदि मेरे चरण श्री वृन्दावन धाम में नहीं जाते, ऐसे चरणों में आग लग जाए। [1]
यदि मेरे नेत्र निशिदिन श्री राधे-श्याम को नहीं निहारते, ऐसे नेत्रों में भी आग लग जाए। [2]
मेरा धन जलकर राख हो जाए जो श्री हरि की सेवा में प्रयोग न हो। [3]
मेरा धन जलकर राख हो जाए जो श्री हरि की सेवा में प्रयोग न हो। [3]
मेरी जिह्वा में अग्नि धधक उठे जो श्री राधे-श्याम का गुणगान न करे। [4]

