व्यास चंद आकास में, जलमें आभामंद ।
जलज मंद यह क़हत हैं, जो हम सो यह चंद ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (143)
जिस प्रकार आकाश में स्थित चंद्रमा का जल में प्रतिबिंब देखकर मंद-बुद्धि कमल उसे अपने जैसा समझ बैठता है, उसी प्रकार रसिक संत इस संसार में सामान्य प्रतीत होते हैं, जबकि वे नित्य ही श्री प्रिया-लाल के सान्निध्य में स्थित रहते हैं और अज्ञानी जन उन्हें अपने समान समझ लेते हैं।
जलज मंद यह क़हत हैं, जो हम सो यह चंद ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (143)
जिस प्रकार आकाश में स्थित चंद्रमा का जल में प्रतिबिंब देखकर मंद-बुद्धि कमल उसे अपने जैसा समझ बैठता है, उसी प्रकार रसिक संत इस संसार में सामान्य प्रतीत होते हैं, जबकि वे नित्य ही श्री प्रिया-लाल के सान्निध्य में स्थित रहते हैं और अज्ञानी जन उन्हें अपने समान समझ लेते हैं।

