हमारी प्यारी सखियन की सिरताज ।
ताहु की महरानी जो सब ब्रज - मंडल - महराज ।। [1]
सील सनेह सरस सोभा - निधि पूरनि जन - मन - काज ।
‘हरीचंद’ की सरवस जीवनी पालनि भक्त - समाज ।। [2]
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (84)
हमारी प्यारी श्री राधिका समस्त सखियों की सिरताज हैं । जो समस्त ब्रज मंडल के महाराज हैं उन श्री कृष्ण की भी वे महारानी हैं । [1]
सर्वोत्तम स्वभाव वाली श्री राधा, जो हर क्षण स्नेह बरसाती हैं वे सरस सोभा की निधि हैं एवं समस्त जनों की हृदय की इच्छाओं को पूर्ण करने वाली हैं । श्री भारतेंदु हरिशचंद्र कहते हैं कि उनके जीवन की प्राण सर्वस्व संजीवनी श्री राधा ही हैं जो भक्त समाज का पालन पोषण करने वाली हैं । [2]
ताहु की महरानी जो सब ब्रज - मंडल - महराज ।। [1]
सील सनेह सरस सोभा - निधि पूरनि जन - मन - काज ।
‘हरीचंद’ की सरवस जीवनी पालनि भक्त - समाज ।। [2]
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (84)
हमारी प्यारी श्री राधिका समस्त सखियों की सिरताज हैं । जो समस्त ब्रज मंडल के महाराज हैं उन श्री कृष्ण की भी वे महारानी हैं । [1]
सर्वोत्तम स्वभाव वाली श्री राधा, जो हर क्षण स्नेह बरसाती हैं वे सरस सोभा की निधि हैं एवं समस्त जनों की हृदय की इच्छाओं को पूर्ण करने वाली हैं । श्री भारतेंदु हरिशचंद्र कहते हैं कि उनके जीवन की प्राण सर्वस्व संजीवनी श्री राधा ही हैं जो भक्त समाज का पालन पोषण करने वाली हैं । [2]

