(कवित्त)
कंजन - महल - चौक, चाँदनी बिछौना तामे,
जरी कौ बितान तान - भान - जोति मंद की। [1]
लालन की मालैं, लाल सारी कोरदार अंग,
औठन की लाली जिमि लाली जीवबंद की॥ [2]
रंभा - सी रमा - सी जहाँ दासी मैनका - सी हठी,
ठाढ़ी कर जोरे, तेउ छीनै जोति चंद की। [3]
गावैं वेद बानी चौर ढारति भवानी राधे,
बैठी सुखदानी महारानी नंद-नन्द की॥ [4]
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (15)
श्री राधा के महल में सुंदर कमल के पुष्पों से युक्त प्रांगण है, जिसमें चाँदनी का बिछौना है तथा ज़री (सोने रंग) का मंडप बना है, जिसकी भव्यता सूर्य की ज्योति को भी मंद करने वाली है। [1]
श्री श्यामा जी ने सुंदर पुष्पों की माला एवं लाल रंग की साड़ी अपने दिव्य अंगों पर धारण कर रखी है, एवं होठों की लालिमा जपा पुष्प की भांति है। [2]
स्वर्ग की अप्सरा रंभा एवं मेनका, तथा वैकुंठेश्वरी श्री लक्ष्मी जी जैसी सुंदर सहचारियाँ श्री श्यामा जी की सेवा में हाथ जोड़े उपस्थित हैं। ऐसा लगता है मानो श्री राधा ने चंद्र की ज्योति ही छीन ली हो (अर्थात् सुंदरता देख चंद्र भी लज्जित हो रहा है)। [3]
श्री सरस्वती वेद वाणी से स्तुति कर रही हैं, श्री पार्वती जी श्री राधा को चँवर डुला रही हैं, तथा श्री नन्दनन्दन की भी महारानी श्री राधा जी अपने आसन पर विराजमान सब को सुख प्रदान कर रही हैं। [4]
कंजन - महल - चौक, चाँदनी बिछौना तामे,
जरी कौ बितान तान - भान - जोति मंद की। [1]
लालन की मालैं, लाल सारी कोरदार अंग,
औठन की लाली जिमि लाली जीवबंद की॥ [2]
रंभा - सी रमा - सी जहाँ दासी मैनका - सी हठी,
ठाढ़ी कर जोरे, तेउ छीनै जोति चंद की। [3]
गावैं वेद बानी चौर ढारति भवानी राधे,
बैठी सुखदानी महारानी नंद-नन्द की॥ [4]
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (15)
श्री राधा के महल में सुंदर कमल के पुष्पों से युक्त प्रांगण है, जिसमें चाँदनी का बिछौना है तथा ज़री (सोने रंग) का मंडप बना है, जिसकी भव्यता सूर्य की ज्योति को भी मंद करने वाली है। [1]
श्री श्यामा जी ने सुंदर पुष्पों की माला एवं लाल रंग की साड़ी अपने दिव्य अंगों पर धारण कर रखी है, एवं होठों की लालिमा जपा पुष्प की भांति है। [2]
स्वर्ग की अप्सरा रंभा एवं मेनका, तथा वैकुंठेश्वरी श्री लक्ष्मी जी जैसी सुंदर सहचारियाँ श्री श्यामा जी की सेवा में हाथ जोड़े उपस्थित हैं। ऐसा लगता है मानो श्री राधा ने चंद्र की ज्योति ही छीन ली हो (अर्थात् सुंदरता देख चंद्र भी लज्जित हो रहा है)। [3]
श्री सरस्वती वेद वाणी से स्तुति कर रही हैं, श्री पार्वती जी श्री राधा को चँवर डुला रही हैं, तथा श्री नन्दनन्दन की भी महारानी श्री राधा जी अपने आसन पर विराजमान सब को सुख प्रदान कर रही हैं। [4]

