ए सजनी लोनो लला लह्यो नंद के गेह - श्री रसखान, रसखान रत्नावली

ए सजनी लोनो लला लह्यो नंद के गेह - श्री रसखान, रसखान रत्नावली

ए सजनी लोनो लला, लह्यो नंद के गेह ।
चितयो मृदु मुसिकाइ के, हरी सबै सुधि गेह॥

- श्री रसखान

हे प्रिय सजनी, श्यामसुंदर के दर्शन का विशेष लाभ है। जब हम नंद के घर जाते हैं, तो वे हमें मधुर मुस्कान से देखते हैं और हमारी सारी सुध-बुध हर लेते हैं।