पिया बिन चन्द्र लग्यो दुःख देन - श्री सूरदास जी

पिया बिन चन्द्र लग्यो दुःख देन - श्री सूरदास जी

(राग विहाग)
पिया बिन चन्द्र लग्यो दुःख देन ।
तारा गिनत गिनत हूँ हारी पलक न लागे चेन ॥ [1]
कहाँ वे यमुना पुलिन मनोहर कहाँ वे सुख की रेन ।
सूरदास प्रभु तिहारे दरस बिन विरहनि कूँ नहिं चेन ॥ [2]

- श्री सूरदास जी

श्री सूरदास जी कहते हैं "श्री कृष्ण के बिना यह चन्द्र भी दुःख दे रहा है । सम्पूर्ण रात्रि मैं तारे गिनते-गिनते हार गयी लेकिन एक क्षण के लिए भी विश्राम नहीं मिला । [1]

कहाँ तो वह यमुना जी का सुन्दर पुलिन जहाँ श्री कृष्ण के संग सुखमय रात्रि व्यतीत होती थी । श्री सूरदास जी कहते हैं "हे श्री कृष्ण, आपके दर्शन के बिना मुझ विरहणी को कहीं भी चैन नहीं मिलता । [2]