ब्रज रज में ये रज मिलि, रज में यमुना नीर।
धन्य भाग्य वा जीव के, जो जामें तजे शरीर॥
- ब्रज के दोहे
इस शरीर की मिट्टी (रज) जब ब्रज की पावन रज में मिल जाती है, और वह रज श्री यमुना जी के पवित्र जल से सिंचित होती है, तो वही परम सौभाग्य का विषय है। धन्य है उस जीव का भाग्य, जो यहाँ शरीर का त्याग करता है।
धन्य भाग्य वा जीव के, जो जामें तजे शरीर॥
- ब्रज के दोहे
इस शरीर की मिट्टी (रज) जब ब्रज की पावन रज में मिल जाती है, और वह रज श्री यमुना जी के पवित्र जल से सिंचित होती है, तो वही परम सौभाग्य का विषय है। धन्य है उस जीव का भाग्य, जो यहाँ शरीर का त्याग करता है।

