चारों दिसि सोभित सदाँ, जाके संत समाज - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, गिरिराज अष्टक (1)

चारों दिसि सोभित सदाँ, जाके संत समाज - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, गिरिराज अष्टक (1)

चारों दिसि सोभित सदाँ, जाके संत समाज ।
सब देवन कौ मुकुट मणि, राजा श्रीगिरिराज ॥

- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, गिरिराज अष्टक (1)

जिसके चारों ओर संत-समाज का पावन निवास सदा शोभायमान रहता है, ऐसे श्री गिरिराज महाराज समस्त देवताओं में मुकुट-मणि हैं।