स्यादब्रह्मपरपर्याय: सर्वानुस्यूतरूपिणी ।
स्वातंत्र्यमपि सैवास्ति तस्मात्सर्वस्तदाश्रित: ।।
- श्री वंशीअलि, श्री राधासिद्धांत (7)
श्री राधा का ही पर्यायवाची [दूसरा नाम] परम ब्रह्म है जो सर्ववस्तुओं एवं प्राणीमात्र में अनुस्यूत है । वे स्वतंत्र हैं तथा सब कुछ उसके [श्री राधा के] आश्रित हैं ।
स्वातंत्र्यमपि सैवास्ति तस्मात्सर्वस्तदाश्रित: ।।
- श्री वंशीअलि, श्री राधासिद्धांत (7)
श्री राधा का ही पर्यायवाची [दूसरा नाम] परम ब्रह्म है जो सर्ववस्तुओं एवं प्राणीमात्र में अनुस्यूत है । वे स्वतंत्र हैं तथा सब कुछ उसके [श्री राधा के] आश्रित हैं ।

