मेरी मति राधिका चरण रजमें रहो।
यही निश्चय कर्यौ अपने मनमें धर्यौ
भूलके कोऊ कछू औरहू फल कहो॥ [1]
करम कोऊ करौ ज्ञान अभ्यास हूँ
मुक्तिके यत्न कर वृथा देहो दहो।
रसिक वल्लभ चरण कमल युग शरण पर
आश धर यह महा पुष्ट पथ फल लहो॥ [2]
- श्री रसिक वल्लभ जी
श्री रसिक वल्लभ जी कहते हैं "कोई कुछ भी परिणाम बताये, परंतु मैंने अपने हृदय से यही दृढ़ निश्चय किया है कि मेरी मति तो श्री राधारानी के चरण कमलों की दिव्य रज में ही लगी रहेगी।" [1]
कोई कर्म पथ पर चलता है, कोई ज्ञान मार्ग का अभ्यास करता है, तो कोई मुक्ति प्राप्त करने के लिए नाना-प्रकार के यत्न करता है। श्री रसिक वल्लभ जी कहते हैं "स्वामिनी श्री राधिका के युगल चरण कमलों की शरण पर विश्वास करना की मेरा एकमात्र पुष्ट मार्ग है।" [2]
यही निश्चय कर्यौ अपने मनमें धर्यौ
भूलके कोऊ कछू औरहू फल कहो॥ [1]
करम कोऊ करौ ज्ञान अभ्यास हूँ
मुक्तिके यत्न कर वृथा देहो दहो।
रसिक वल्लभ चरण कमल युग शरण पर
आश धर यह महा पुष्ट पथ फल लहो॥ [2]
- श्री रसिक वल्लभ जी
श्री रसिक वल्लभ जी कहते हैं "कोई कुछ भी परिणाम बताये, परंतु मैंने अपने हृदय से यही दृढ़ निश्चय किया है कि मेरी मति तो श्री राधारानी के चरण कमलों की दिव्य रज में ही लगी रहेगी।" [1]
कोई कर्म पथ पर चलता है, कोई ज्ञान मार्ग का अभ्यास करता है, तो कोई मुक्ति प्राप्त करने के लिए नाना-प्रकार के यत्न करता है। श्री रसिक वल्लभ जी कहते हैं "स्वामिनी श्री राधिका के युगल चरण कमलों की शरण पर विश्वास करना की मेरा एकमात्र पुष्ट मार्ग है।" [2]

