स्वामी बिना बिहार नहि, साधन करो अनेक ।
तुस कूटत बिन धान के, बड़े चतुर अविवेक॥
- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (56)
ललिता-अवतार, रसिक अनन्य नृपति, श्री स्वामी हरिदास जी की कृपा के बिना श्री राधा-कृष्ण के नित्य-विहार की प्राप्ति असंभव है, चाहे कोई असंख्य साधन क्यों न कर ले। जैसे धान के बिना भूसी कूटने से कुछ नहीं मिलता, वैसे ही उनकी कृपा बिना साधना निष्फल है।
तुस कूटत बिन धान के, बड़े चतुर अविवेक॥
- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (56)
ललिता-अवतार, रसिक अनन्य नृपति, श्री स्वामी हरिदास जी की कृपा के बिना श्री राधा-कृष्ण के नित्य-विहार की प्राप्ति असंभव है, चाहे कोई असंख्य साधन क्यों न कर ले। जैसे धान के बिना भूसी कूटने से कुछ नहीं मिलता, वैसे ही उनकी कृपा बिना साधना निष्फल है।

