श्रीराधा राधा रटौं , राधा ही कौ ध्यान।
सदाँ लाल बलबीर उर, राधा नाम प्रधान॥ [1]
ध्यान धरहिं । जतन बहु करहिं । अबल मन कर कर।
सुख उर भरहिं । दृगन जल ढरहिं । चरन सिर धर धर॥ [2]
यह हम साधहिं । नाम अराधनहिं । हर जग बाधे।
जन सुख साधे। सुजस अगाधे । जै श्रीराधे॥ [3]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, गिरिराज अष्टक (45)
नित्य ही श्री राधा राधा ही रटो और राधा ही का ध्यान करो। श्री लाल बलबीर कहते हैं कि मेरे हृदय में राधा नाम और राधा नाम की दिव्यता, प्रधानता और भव्यता नित्य बसी हुई है। [1]
श्री राधा का ही विभिन्न यत्नों से ध्यान करके, अपने मन को अबला बनाकर, हृदय में सुख भरते हुए, प्रेम भरे आँसु बहाते हुए, श्री राधा के चरणों में अपना सिर धर कर, विनती करनी चाहिए। [2]
हर प्रकार की बाधा का हरण करने वाली श्री राधा के नाम की आराधना करना ही हमारा साधन है। समस्त जनों को सुख पहुँचाने वाली, जिनका यश सुंदर और अगाध है, ऐसी अलबेली सरकार श्री राधे की जय हो जय हो। [3]
सदाँ लाल बलबीर उर, राधा नाम प्रधान॥ [1]
ध्यान धरहिं । जतन बहु करहिं । अबल मन कर कर।
सुख उर भरहिं । दृगन जल ढरहिं । चरन सिर धर धर॥ [2]
यह हम साधहिं । नाम अराधनहिं । हर जग बाधे।
जन सुख साधे। सुजस अगाधे । जै श्रीराधे॥ [3]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, गिरिराज अष्टक (45)
नित्य ही श्री राधा राधा ही रटो और राधा ही का ध्यान करो। श्री लाल बलबीर कहते हैं कि मेरे हृदय में राधा नाम और राधा नाम की दिव्यता, प्रधानता और भव्यता नित्य बसी हुई है। [1]
श्री राधा का ही विभिन्न यत्नों से ध्यान करके, अपने मन को अबला बनाकर, हृदय में सुख भरते हुए, प्रेम भरे आँसु बहाते हुए, श्री राधा के चरणों में अपना सिर धर कर, विनती करनी चाहिए। [2]
हर प्रकार की बाधा का हरण करने वाली श्री राधा के नाम की आराधना करना ही हमारा साधन है। समस्त जनों को सुख पहुँचाने वाली, जिनका यश सुंदर और अगाध है, ऐसी अलबेली सरकार श्री राधे की जय हो जय हो। [3]

