प्रान वारि बलिहारी लै, सुधि बुधि सकल विसारि ।
बदन सुधानिधि निरखि कें, फूली तन सहचारी ॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सहज सुख (111)
सहचरियाँ श्री प्रिया-प्रियतम के मुखचंद्र का दर्शन करके अत्यंत आनंदित और प्रफुल्लित हो उठती हैं। वे अपनी सारी सुध-बुध खोकर उनकी बलैया लेती हुई अपने प्राणों को निछावर कर देती हैं।
बदन सुधानिधि निरखि कें, फूली तन सहचारी ॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सहज सुख (111)
सहचरियाँ श्री प्रिया-प्रियतम के मुखचंद्र का दर्शन करके अत्यंत आनंदित और प्रफुल्लित हो उठती हैं। वे अपनी सारी सुध-बुध खोकर उनकी बलैया लेती हुई अपने प्राणों को निछावर कर देती हैं।

