ठौर-ठौर पिय रचत हैं, आसन कुसुम रसाल।
को जानैं कहाँ बैठीहैं, अलबेली नव बाल॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, प्रेमावली (74)
प्रियतम श्री कृष्ण मार्ग में जगह-जगह पुष्पों के सुंदर आसनों का निर्माण करते हैं, यह सोचकर कि न जाने कहाँ अलबेली सरकार श्री राधिका विश्राम करेंगी।
को जानैं कहाँ बैठीहैं, अलबेली नव बाल॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, प्रेमावली (74)
प्रियतम श्री कृष्ण मार्ग में जगह-जगह पुष्पों के सुंदर आसनों का निर्माण करते हैं, यह सोचकर कि न जाने कहाँ अलबेली सरकार श्री राधिका विश्राम करेंगी।

