वृंदावन गिरी तैं चली रस की उठत तरंग - श्री वृंदावन देवाचार्य, गीतामृत गंगा

वृंदावन गिरी तैं चली रस की उठत तरंग - श्री वृंदावन देवाचार्य, गीतामृत गंगा

वृंदावन गिरी तैं चली, रस की उठत तरंग ।
करहु स्नान नित भक्त मन इहिं गीतामृत गंग ॥

- श्री वृंदावन देवाचार्य, गीतामृत गंगा

वृन्दावन हिमगिरि से प्रवाहित इस गीतामृत-गंगा की रस-धारा से रस की तरंगें उठती हैं, जिनमें रसिक भक्तों के मन नित्य स्नान करते रहते हैं।