नवल लाल ब्रिषभान दुलारी - श्री केवल राम जी, रास मान के पद (23)

नवल लाल ब्रिषभान दुलारी - श्री केवल राम जी, रास मान के पद (23)

(राग कानरा)
नवल लाल ब्रिषभान दुलारी ।
थइ थइ करत रास रस खेलत इक तें इक नौतन गति न्यारी ॥ [1]
तान बँधान सपत सुर गावत रीझत देखि सरद उजिआरी ।
केवल लाल तोरि त्रिणु बोल्ये तो सम को नाँहिन पिय प्यारी ॥ [2]

- श्री केवल राम जी, रास मान के पद (23)

नवल किशोर श्री कृष्ण एवं वृषभानु दुलारी श्री राधा थेइ-थेइ करते हुए रास लीला में नृत्य कर रहे हैं, जिसमें वे एक से एक सुन्दर नविन गति प्रदर्शित करते हैं । [1]

युगल किशोर सातों सुरों में सुन्दर तान गाते हैं जिसको देखकर शरद्पूर्णिमा का चन्द्र उनपर रीझ रहा है । श्री केवल राम कहते हैं कि श्री कृष्ण एक तृण को तोड़ते हुए श्री राधा से कहते हैं "हे प्यारी जू, आपके जैसा दूसरा और कोई नहीं है ।" [2]