जयति निकुंजबिहारिनी, हरनि स्याम संताप ।
जिन की तन-छाया तुरत, हरत मदन-मन-दाप ॥
- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (9.2)
निकुञ्ज में विहार करने वाली श्री राधा रानी की जय हो, जो श्यामसुंदर के हृदय के समस्त संताप और ताप को हर लेने वाली हैं। जिनकी श्रीअंग की छाया मात्र से कामदेव के मन का सारा अभिमान और दर्प तत्क्षण नष्ट हो जाता है।
जिन की तन-छाया तुरत, हरत मदन-मन-दाप ॥
- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (9.2)
निकुञ्ज में विहार करने वाली श्री राधा रानी की जय हो, जो श्यामसुंदर के हृदय के समस्त संताप और ताप को हर लेने वाली हैं। जिनकी श्रीअंग की छाया मात्र से कामदेव के मन का सारा अभिमान और दर्प तत्क्षण नष्ट हो जाता है।

