तेरे बदन की सोभा - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (85)

तेरे बदन की सोभा - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (85)

तेरे बदन की सोभा कहन कों, प्रिय मेरे नैननि रसनाहि दीजै ।
इतनौ बर माँगत नवरंग प्रति, रोम रोम साँवल रस पीजै ॥

- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (85)

हे प्रियतम! आपके मुखारविंद की अनुपम शोभा का वर्णन करने के लिए, मेरे नेत्रों को वाणी (जीभ) की शक्ति प्रदान कीजिये। मैं बस इतना ही वरदान माँगता हूँ कि मेरा प्रत्येक रोम आपके उस सांवले सलोने श्यामसुंदर के रूप के आनंद-रस का निरंतर पान करता रहे।