रूप-बेली प्यारी बनी, प्रीतम प्रेम-तमाल ।
द्वै मन मिलि एकै भये, श्रीराधावल्लभ लाल ॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, प्रेमावली (3)
श्री प्रिया जी (राधा) साक्षात् रूप और लावण्य की सुकोमल लता हैं, और उनके प्रियतम श्री कृष्ण प्रेम के सुदृढ़ तमाल वृक्ष हैं। जिस प्रकार एक स्वर्ण-लता तमाल के वृक्ष से लिपटी रहती है, उसी प्रकार युगल मनस्तत्त्व का ही मिलित विग्रह श्री राधावल्लभ हैं
द्वै मन मिलि एकै भये, श्रीराधावल्लभ लाल ॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, प्रेमावली (3)
श्री प्रिया जी (राधा) साक्षात् रूप और लावण्य की सुकोमल लता हैं, और उनके प्रियतम श्री कृष्ण प्रेम के सुदृढ़ तमाल वृक्ष हैं। जिस प्रकार एक स्वर्ण-लता तमाल के वृक्ष से लिपटी रहती है, उसी प्रकार युगल मनस्तत्त्व का ही मिलित विग्रह श्री राधावल्लभ हैं

