नित्य विहारनि लाडली, नित्यविहारी लाल ।
युगल केलि रसमाधुरी, आनंद रूप रसाल ॥
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, युगल केलि रस मंजरी (1)
श्री लाड़ली जी (राधा) नित्य विहार करने वाली हैं और श्री लाल जी (कृष्ण) भी नित्यविहारी हैं। इन दोनों युगल की केली-क्रीड़ा अत्यंत मधुर रस से भरी हुई है, जो साक्षात् आनंद का ही रसमय स्वरूप है।
युगल केलि रसमाधुरी, आनंद रूप रसाल ॥
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, युगल केलि रस मंजरी (1)
श्री लाड़ली जी (राधा) नित्य विहार करने वाली हैं और श्री लाल जी (कृष्ण) भी नित्यविहारी हैं। इन दोनों युगल की केली-क्रीड़ा अत्यंत मधुर रस से भरी हुई है, जो साक्षात् आनंद का ही रसमय स्वरूप है।

