प्यारी तव पद टहल कौं, कमलादिक ललचाहिँ - श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (85)

प्यारी तव पद टहल कौं, कमलादिक ललचाहिँ - श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (85)

प्यारी तव पद टहल कौं, कमलादिक ललचाहिँ ।
शुक नारद आदिक सवै, वांछित पावत नाहिँ ॥

- श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (85)

हे प्यारी जू (श्री राधा)! आपके चरणों की सेवा और टहल प्राप्त करने के लिए लक्ष्मी जी (कमला) आदि देवियाँ भी निरंतर ललचाती रहती हैं। यहाँ तक कि श्री शुकदेव जी और नारद जी जैसे महान मुनीश्वर भी जिस दुर्लभ सेवा की सदा अभिलाषा करते हैं, वह उन्हें भी सुगमता से प्राप्त नहीं हो पाती।