तेरे चरण कमल में श्याम लिपट जाऊँ रज बन के।
मोर मुकुट माथे तिलक बिराजे, तेरे गोल कपोलन श्याम ॥ [1]
गल में बैजन्ती माला सोहे, तेरी पतली कमर पे श्याम,
लिपट जाऊँ पट बनके ॥ तेरे चरण कमल... [2]
चन्द्र सखी भज बालकृष्ण छवि, तेरे कर कमलन से श्याम ।
टूट जाऊँ घट बनके ॥ तेरे चरण कमल... [3]
- श्री चन्द्रसखी जी
हे श्री श्यामसुंदर, मेरी यह कामना है की मैं आपके चरणों की रज बनकर सदा उन्हीं से लिपटी रहूँ ।
आपके माथे पर मोर मुकुट विराजमान है, सुन्दर तिलक धारण है, सुन्दर गोल कपोल है,जो की मनहरण है । [1]
आपके गले में वैजन्ती माला शोभायमान है, सुन्दर पतली कमर है जिससे वस्त्र बनकर मैं लिपट जाना चाहता हूँ । [2]
श्री चन्द्रसखी जी अपने गुरु श्री बाल कृष्ण का स्मरण कर कहते हैं कि मैं कब वह मटकी बनूंगा और उनके कर-कमलों के स्पर्श से टूट जाऊंगा । [3]
मोर मुकुट माथे तिलक बिराजे, तेरे गोल कपोलन श्याम ॥ [1]
गल में बैजन्ती माला सोहे, तेरी पतली कमर पे श्याम,
लिपट जाऊँ पट बनके ॥ तेरे चरण कमल... [2]
चन्द्र सखी भज बालकृष्ण छवि, तेरे कर कमलन से श्याम ।
टूट जाऊँ घट बनके ॥ तेरे चरण कमल... [3]
- श्री चन्द्रसखी जी
हे श्री श्यामसुंदर, मेरी यह कामना है की मैं आपके चरणों की रज बनकर सदा उन्हीं से लिपटी रहूँ ।
आपके माथे पर मोर मुकुट विराजमान है, सुन्दर तिलक धारण है, सुन्दर गोल कपोल है,जो की मनहरण है । [1]
आपके गले में वैजन्ती माला शोभायमान है, सुन्दर पतली कमर है जिससे वस्त्र बनकर मैं लिपट जाना चाहता हूँ । [2]
श्री चन्द्रसखी जी अपने गुरु श्री बाल कृष्ण का स्मरण कर कहते हैं कि मैं कब वह मटकी बनूंगा और उनके कर-कमलों के स्पर्श से टूट जाऊंगा । [3]

