चतुरदास (श्री) हरिदास कै, अद्भुत नित्य बिहार ।
इहाँ औरनि की कहा चलै, वेद न पावै पार ॥
- श्री चतुर दास जी, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (12)
श्री चतुरदास जी कहते हैं कि स्वामी श्री हरिदास जी का यह अद्भुत नित्य विहार है, जहाँ औरों की तो क्या चले, साक्षात् वेद की बुद्धि से भी यह परे है।
इहाँ औरनि की कहा चलै, वेद न पावै पार ॥
- श्री चतुर दास जी, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (12)
श्री चतुरदास जी कहते हैं कि स्वामी श्री हरिदास जी का यह अद्भुत नित्य विहार है, जहाँ औरों की तो क्या चले, साक्षात् वेद की बुद्धि से भी यह परे है।

