(सवैया)
शारद शेष की कौन गिनै, गुन गावत चारहु वेद की बानी। [1]
'चन्द्र' से भान से जाके हैं चाकर, द्वार रखावत शंभु भवानी॥ [2]
शक्तकी शक्ति अशक्ति की है, मुक्तिकी भक्तिकी दानी महानी। [3]
काहे न राज करै तिहूँलोक में, जाकी है राधिका सी महारानी॥ [4]
- श्री चन्द्र जी
सरस्वती और शेषजी का क्या कहना, उनके गुणों का बखान तो स्वयं चारों वेद कर रहे हैं। [1]
चंद्रमा और सूर्य उनकी सेवा में तत्पर हैं, और भगवान शिव तथा माता पार्वती उनके द्वार पर विराजमान रहते हैं। [2]
वे शक्तियों को भी शक्ति प्रदान करती हैं; निर्बलों को बल देने का सामर्थ्य भी इन्हीं के पास है। वे मुक्ति और भक्ति की महादानी हैं। [3]
ऐसी जो श्री राधिका महारानी, यदि वे श्रीकृष्ण के संग सदा हों, तो वे तीनों लोकों के राजा क्यों न कहलाएँ? [4]
शारद शेष की कौन गिनै, गुन गावत चारहु वेद की बानी। [1]
'चन्द्र' से भान से जाके हैं चाकर, द्वार रखावत शंभु भवानी॥ [2]
शक्तकी शक्ति अशक्ति की है, मुक्तिकी भक्तिकी दानी महानी। [3]
काहे न राज करै तिहूँलोक में, जाकी है राधिका सी महारानी॥ [4]
- श्री चन्द्र जी
सरस्वती और शेषजी का क्या कहना, उनके गुणों का बखान तो स्वयं चारों वेद कर रहे हैं। [1]
चंद्रमा और सूर्य उनकी सेवा में तत्पर हैं, और भगवान शिव तथा माता पार्वती उनके द्वार पर विराजमान रहते हैं। [2]
वे शक्तियों को भी शक्ति प्रदान करती हैं; निर्बलों को बल देने का सामर्थ्य भी इन्हीं के पास है। वे मुक्ति और भक्ति की महादानी हैं। [3]
ऐसी जो श्री राधिका महारानी, यदि वे श्रीकृष्ण के संग सदा हों, तो वे तीनों लोकों के राजा क्यों न कहलाएँ? [4]

