राधा मंगल नाम है, राधा मंगल रूप - श्री ब्रजजीवन जी

राधा मंगल नाम है, राधा मंगल रूप - श्री ब्रजजीवन जी

राधा मंगल नाम है, राधा मंगल रूप।
राधा मूल संजीवनी, राधा केलि अनूप॥ [1]
राधा कृपा कटाक्ष की लागी हिय बौछार।
राधा गुन सुमिरन कथन छिन-छिन नित्य-विहार॥ [2]
जाग्रत सुपने सैन में हिय राधा कौ ध्यान।
अंतर-बाहर दिस-विदिस वही रूप मंडरान॥ [3]

- श्री ब्रजजीवन जी

श्री राधा नाम मंगल करने वाला है, श्री राधा का स्वरूप भी मंगलकारी है, श्री राधा ही मेरी मूल संजीवनी है और उनकी केलि-लीला अनुपम है। [1]

श्री राधा की कटाक्ष-रूपी कृपा मेरे हृदय में बरस रही है। मैं श्री राधा के गुणों का सुमिरन और गान करता हूँ तथा हर क्षण उनके नित्य-विहार का चिंतन-अवलोकन करता हूँ। [2]

श्री ब्रजजीवन जी कहते हैं कि जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति में मेरे हृदय में श्री राधा का ही ध्यान रहता है। अंदर-बाहर, दिन-रात मेरे मन और इन्द्रियों में श्री राधा का वही सुंदर रूप छाया रहता है। [3]