रसिक कहावै सोइ जाके, दम्पति मिलन चटपटी ।
वृन्दावन हित रूप प्रेम की, जानों सृष्टि अटपटी ॥
- श्री हित वृन्दावन दास जी
वृन्दावन-रज का सच्चा रसिक वही कहलाता है, जो युगल सरकार श्री राधा कृष्ण को एक-दूसरे पर बलिहार होते देखकर (अथवा उन्हें एक साथ मिलाकर) स्वयं भी बलिहार हो उठे। श्री हित वृन्दावन दास जी कहते हैं कि इस प्रेम की रचना ही कुछ अनोखी और अटपटी होती है।
वृन्दावन हित रूप प्रेम की, जानों सृष्टि अटपटी ॥
- श्री हित वृन्दावन दास जी
वृन्दावन-रज का सच्चा रसिक वही कहलाता है, जो युगल सरकार श्री राधा कृष्ण को एक-दूसरे पर बलिहार होते देखकर (अथवा उन्हें एक साथ मिलाकर) स्वयं भी बलिहार हो उठे। श्री हित वृन्दावन दास जी कहते हैं कि इस प्रेम की रचना ही कुछ अनोखी और अटपटी होती है।

