बाँकौ मारग प्रेम कौ कहत बनै नहिं बैन - ब्रज के दोहे

बाँकौ मारग प्रेम कौ कहत बनै नहिं बैन - ब्रज के दोहे

बाँकौ मारग प्रेम कौ, कहत बनै नहिं बैन।
नैना श्रवन जु होत हैं, श्रवन होत हैं नैन॥

- ब्रज के दोहे

यह प्रेम का मार्ग अत्यंत बाँका है, जिसे वाणी से कहा नहीं जा सकता। इसमें नेत्र और श्रवण की गति भी उलट जाती है।