छके जुगल छवि वारूनी, डसे प्रेम रस ब्याल ।
नैन न परसे गारुडू, देखि दुहुँकी कौ ख्याल ॥
- श्री भगवत रसिक जी, भगवत रसिक की वाणी, श्री नित्यविहारी जुगल ध्यान (124)
प्रिया-प्रियतम की छवि-रूपी वारुणी का आस्वादन कर और प्रेम-रस के सर्प से डसे हुए सहचरियों के नयन ऐसे मतवाले हो गए हैं कि किसी गारुड़-मंत्र (जहर उतारने वाला मंत्र) का भी उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
नैन न परसे गारुडू, देखि दुहुँकी कौ ख्याल ॥
- श्री भगवत रसिक जी, भगवत रसिक की वाणी, श्री नित्यविहारी जुगल ध्यान (124)
प्रिया-प्रियतम की छवि-रूपी वारुणी का आस्वादन कर और प्रेम-रस के सर्प से डसे हुए सहचरियों के नयन ऐसे मतवाले हो गए हैं कि किसी गारुड़-मंत्र (जहर उतारने वाला मंत्र) का भी उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

