(सवैया)
हरिनाम है केवल नित यहाँ, सब विश्व अनित्य विचारना सीखो। [1]
परनिन्दा असत्य विवाद तजौ, मुख से 'हरे कृष्ण' उचारना सीखो॥ [2]
निज नैन चकोर बना करके, मनमोहन रूप निहारना सीखो। [3]
प्राणयेश अवश्य मिलेगा तुम्हें, तुम प्रेम से नेक पुकारना सीखो॥ [4]
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’
इस संसार में केवल श्री हरि का नाम ही नित्य है; इसके अतिरिक्त सब कुछ अनित्य है — यह विचार करना सीखो। [1]
दूसरों की निन्दा, असत्य वचन और विवाद का त्याग करो, तथा मुख से ‘हरे कृष्ण’ का उच्चारण करना सीखो। [2]
अपनी आँखों को चकोर पक्षी बनाकर श्री कृष्ण के रूप को निरंतर निहारना सीखो। [3]
डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’ जी कहते हैं — तुम्हें श्री कृष्ण अवश्य मिलेंगे, बस उन्हें प्रेमपूर्वक पुकारना सीखो। [4]
हरिनाम है केवल नित यहाँ, सब विश्व अनित्य विचारना सीखो। [1]
परनिन्दा असत्य विवाद तजौ, मुख से 'हरे कृष्ण' उचारना सीखो॥ [2]
निज नैन चकोर बना करके, मनमोहन रूप निहारना सीखो। [3]
प्राणयेश अवश्य मिलेगा तुम्हें, तुम प्रेम से नेक पुकारना सीखो॥ [4]
- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’
इस संसार में केवल श्री हरि का नाम ही नित्य है; इसके अतिरिक्त सब कुछ अनित्य है — यह विचार करना सीखो। [1]
दूसरों की निन्दा, असत्य वचन और विवाद का त्याग करो, तथा मुख से ‘हरे कृष्ण’ का उच्चारण करना सीखो। [2]
अपनी आँखों को चकोर पक्षी बनाकर श्री कृष्ण के रूप को निरंतर निहारना सीखो। [3]
डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’ जी कहते हैं — तुम्हें श्री कृष्ण अवश्य मिलेंगे, बस उन्हें प्रेमपूर्वक पुकारना सीखो। [4]

