यह शोभा संसार की, ज्यों टेसू के फूल ।
नारायण फल आश तजि, ललित देख जिन भूल ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (36)
यह संसार टेसू के फूल के समान निरर्थक है, जो दिखने में तो अत्यंत सुंदर और चटकीले होते हैं, किंतु उनमें न तो सुगंध होती है और न ही वे फल देते हैं। इसलिए इस संसार से आशा लगानी छोड़कर, श्री श्यामा-श्याम की सुंदर जोड़ी की ओर निहारो।
नारायण फल आश तजि, ललित देख जिन भूल ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (36)
यह संसार टेसू के फूल के समान निरर्थक है, जो दिखने में तो अत्यंत सुंदर और चटकीले होते हैं, किंतु उनमें न तो सुगंध होती है और न ही वे फल देते हैं। इसलिए इस संसार से आशा लगानी छोड़कर, श्री श्यामा-श्याम की सुंदर जोड़ी की ओर निहारो।

