आनँद आजु नंद के द्वार ।
दास अनन्य भजन - रस कारन, प्रगटे लाल मनोहर ग्वार ॥ [1]
चंदन सकल धेनु तन मंडित कुसुम दाम रंजित आगार । [2]
पूरन कुंभ बने तोरन पर बीच रुचिर पीपर की डार ॥ [3]
युवति-यूथ मिलि गोप विराजत, बाजत पणव मृदङ्ग सुतार । [4]
(जै श्री) हित हरिवंश अजिर वन वीथिनु, दधि मधि दूध हरद के खार ॥ [5]
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्फुट वाणी (11)
आज नंद के द्वार पर आनन्द छाया हुआ है । वहाँ अनन्य दासों के भजन-रस की निष्पत्ति के लिए मनोहर ग्वाल पुत्र प्रकट हुये हैं । [1]
नन्दगाँव की सब गायों के शरीर चन्दन से मण्डित किये गये हैं और नन्द-भवन फूलों की बन्दनवार से सुशोभित है । [2]
भवन के द्वार पर जल पूर्ण कलश शोभायमान हैं जिनके बीच में पीपल की सुन्दर डाल लगी हुई है । [3]
युवतियों के यूथ सहित गोपगण वहाँ विराजमान हैं एवं पणव और मृदंग में सुन्दर ताल बज रही है । [4]
श्रीहित हरिवंश कहते हैं कि भवन के आँगन में एवं गाँव की गलियों में हल्दी मिश्रित दूध दही के बहने से गढ़े भर गये हैं । [5]
दास अनन्य भजन - रस कारन, प्रगटे लाल मनोहर ग्वार ॥ [1]
चंदन सकल धेनु तन मंडित कुसुम दाम रंजित आगार । [2]
पूरन कुंभ बने तोरन पर बीच रुचिर पीपर की डार ॥ [3]
युवति-यूथ मिलि गोप विराजत, बाजत पणव मृदङ्ग सुतार । [4]
(जै श्री) हित हरिवंश अजिर वन वीथिनु, दधि मधि दूध हरद के खार ॥ [5]
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्फुट वाणी (11)
आज नंद के द्वार पर आनन्द छाया हुआ है । वहाँ अनन्य दासों के भजन-रस की निष्पत्ति के लिए मनोहर ग्वाल पुत्र प्रकट हुये हैं । [1]
नन्दगाँव की सब गायों के शरीर चन्दन से मण्डित किये गये हैं और नन्द-भवन फूलों की बन्दनवार से सुशोभित है । [2]
भवन के द्वार पर जल पूर्ण कलश शोभायमान हैं जिनके बीच में पीपल की सुन्दर डाल लगी हुई है । [3]
युवतियों के यूथ सहित गोपगण वहाँ विराजमान हैं एवं पणव और मृदंग में सुन्दर ताल बज रही है । [4]
श्रीहित हरिवंश कहते हैं कि भवन के आँगन में एवं गाँव की गलियों में हल्दी मिश्रित दूध दही के बहने से गढ़े भर गये हैं । [5]

