हर्षि देहु वर मांगहूँ यशुमति जीवनमूर - श्री भक्तराम

हर्षि देहु वर मांगहूँ यशुमति जीवनमूर - श्री भक्तराम

हर्षि देहु वर मांगहूँ, यशुमति जीवनमूर।
नित दासनके पगनकी, भक्तरामको धूर॥

- श्री भक्तराम

हे माता यशोदा के जीवन-प्राण (श्री कृष्ण)! आप प्रसन्न होकर मुझे यह वरदान प्रदान कीजिए कि मुझे सदैव आपके अनन्य दासों के चरणों की पावन धूलि प्राप्त होती रहे।