रसिक जननि कौ संग मनोहर, बानी बिसद बिचार बिचारैं।
बड़भागी रसभागी वे ही, अलीकिसोरी कहत पुकारैं॥
- श्री किशोरी अलि जी, मन शिक्षा, (14)
श्री किशोरी अलि जी पुकार कहते हैं कि रसिकों का संग अत्यंत मनोहर और कल्याणकारी है; जो साधक उनके संग में रहकर उनकी वाणी का मनन करता है, उस पर श्री प्रिया-प्रियतम की विशेष कृपा होती है, उसके अंतःकरण में दिव्य लीलाओं का स्फुरण होने लगता है और वही सच्चा बड़भागी नित्य-रस का अधिकारी बनता है।
बड़भागी रसभागी वे ही, अलीकिसोरी कहत पुकारैं॥
- श्री किशोरी अलि जी, मन शिक्षा, (14)
श्री किशोरी अलि जी पुकार कहते हैं कि रसिकों का संग अत्यंत मनोहर और कल्याणकारी है; जो साधक उनके संग में रहकर उनकी वाणी का मनन करता है, उस पर श्री प्रिया-प्रियतम की विशेष कृपा होती है, उसके अंतःकरण में दिव्य लीलाओं का स्फुरण होने लगता है और वही सच्चा बड़भागी नित्य-रस का अधिकारी बनता है।

