अधम अजामिल आदि जे, हौं तिनकौ हौं राउ - श्री मतिराम, मतिराम सतसई (535)

अधम अजामिल आदि जे, हौं तिनकौ हौं राउ - श्री मतिराम, मतिराम सतसई (535)

अधम अजामिल आदि जे, हौं तिनकौ हौं राउ।
मोहूँ पर कीजै दया, कान्ह दया दरियाउ॥

- श्री मतिराम, मतिराम सतसई (535)

अजामिल जैसे जितने भी अधम और महापापी हुए हैं, मैं उन सबका शिरोमणि हूँ अर्थात् मैं उन सबसे बड़ा अपराधी हूँ। हे श्री कृष्ण! अब मुझ पर भी अपनी करुणा कीजिए, क्योंकि आप तो दया के अथाह सागर हैं।